पाकिस्तान की वर्तमान सरकार ने अपना पहला पूर्ण बजट पेश किया है, जो पिछले दो वर्षों में संकटों से निपटने के बाद राजनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है। यह बजट आर्थिक स्थिरता और विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करता है। सरकार ने कर राजस्व बढ़ाने और खर्चों को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। बजट में रक्षा खर्च में मामूली वृद्धि की गई है, जबकि सामाजिक क्षेत्र के लिए आवंटन में वृद्धि की गई है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ समझौते की शर्तों को पूरा करने के लिए सरकार को कठोर वित्तीय उपाय करने पड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है, क्योंकि इसे आर्थिक चुनौतियों का सामना करना है और साथ ही जनता की अपेक्षाओं को भी पूरा करना है। बजट में ऊर्जा क्षेत्र के सुधारों और निजीकरण पर भी जोर दिया गया है।