पाकिस्तान में कुत्तों की बढ़ती आबादी और रेबीज के मामलों के बीच, सबीना फारूक ने कुत्तों को मारने (culling) के बजाय टीकाकरण की वकालत करते हुए सवाल उठाया है कि लोग कुत्तों की हत्या का समर्थन क्यों करते हैं। वह एक याचिका के माध्यम से इस मुद्दे को उठा रही हैं, जिसमें उन्होंने अधिकारियों से टीकाकरण कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने और कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए अधिक मानवीय तरीकों पर विचार करने का आग्रह किया है। फारूक का तर्क है कि कुत्तों की हत्या एक क्रूर और अप्रभावी तरीका है, जबकि टीकाकरण अधिक स्थायी और नैतिक समाधान प्रदान करता है। पाकिस्तान में रेबीज एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, और कुत्तों को इसका मुख्य स्रोत माना जाता है। याचिका में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि टीकाकरण न केवल कुत्तों को सुरक्षित रखेगा बल्कि मनुष्यों को भी रेबीज से बचाएगा। इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस तेज हो गई है, जिसमें पशु अधिकार कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हैं।
