संघीय शरिया अदालत ने महिलाओं के उत्तराधिकार के अधिकार को पारिवारिक निर्णय के बजाय एक धार्मिक अधिकार घोषित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में महिलाओं को संपत्ति का अधिकार है और इसे परिवार द्वारा मनमाने ढंग से सीमित नहीं किया जा सकता। यह फैसला महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने कहा कि उत्तराधिकार के नियम कुरान और सुन्नत पर आधारित होने चाहिए, न कि स्थानीय रीति-रिवाजों पर। इस निर्णय से उन महिलाओं को लाभ होने की उम्मीद है जिन्हें पहले उनके उत्तराधिकार अधिकारों से वंचित किया गया था। अदालत ने सभी प्रासंगिक अधिकारियों को इस फैसले को लागू करने का निर्देश दिया है। यह फैसला पाकिस्तान में महिलाओं के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा।