पाकिस्तान सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आवंटन में भारी कटौती की है। इस कटौती से देश में जलवायु परिवर्तन से निपटने की योजनाओं और नीतियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जलवायु परिवर्तन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, खासकर तब जब देश पहले से ही जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहा है। बजट में कटौती के कारण बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी कमजोर हो सकती है। विपक्ष ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'अदूरदर्शी' बताया है। सरकार का तर्क है कि आर्थिक चुनौतियों के कारण यह कटौती आवश्यक थी, लेकिन आलोचकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन एक दीर्घकालिक खतरा है और इसमें निवेश को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। इस कटौती से पाकिस्तान के अंतर्राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी बाधा आ सकती है।