आगामी वित्तीय वर्ष के संघीय बजट में जलवायु परिवर्तन से संबंधित आवंटनों में कटौती की गई है, जिससे पाकिस्तान के जलवायु-स्मार्ट भविष्य की राह मुश्किल हो सकती है। आपदा प्रबंधन के लिए धन में वृद्धि के बावजूद, जलवायु परिवर्तन के शमन (mitigation) के लिए आवंटित राशि 603 अरब रुपये से घटकर 124 अरब रुपये हो गई है, और अनुकूलन (adaptation) के लिए 85 अरब रुपये से घटकर 70 अरब रुपये। ऊर्जा, खाद्य, उद्योग, परिवहन और कृषि जैसे क्षेत्रों में भी बजट में कटौती की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान जैसे देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अनुकूलन और लचीलापन (resilience) पर अधिक ध्यान देना चाहिए। जर्मनवॉच के नीति सलाहकार जियोवानी मौरिस प्रदिप्ता ने बजट में पारदर्शिता और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया है। पूर्व जलवायु परिवर्तन मंत्री मलिक अमीन असलम ने इस बजट को "आत्मघाती" बताते हुए जलवायु अनुकूलन संबंधी परियोजनाओं के लिए धन की कमी पर चिंता व्यक्त की है। विश्व बैंक और शिकागो विश्वविद्यालय की रिपोर्टों ने भी जलवायु परिवर्तन के खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है।
