प्रशांत महासागर के कई द्वीपीय राष्ट्र येरूशलेम में अपने दूतावास स्थापित करने पर विचार कर रहे हैं। इस कदम के पीछे बाइबिल की प्राचीन भविष्यवाणियों और धार्मिक मान्यताओं का प्रभाव माना जा रहा है। इन राष्ट्रों का मानना है कि येरूशलेम एक महत्वपूर्ण शहर है और वहां दूतावास स्थापित करना उनके लिए महत्वपूर्ण है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम इज़राइल के साथ संबंधों को मजबूत करने और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर समर्थन हासिल करने की रणनीति भी हो सकती है। हालांकि, इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनयिक तनाव बढ़ने की आशंका है। ये फैसले पापुआ न्यू गिनी और सोलोमन द्वीपसमूह जैसे देशों में लिए जा रहे हैं, जहां धार्मिक भावनाएं प्रबल हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य प्रशांत द्वीप राष्ट्र इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।