विश्व कप 2026 में अब तक सात 'आत्म-गोल' हो चुके हैं, जबकि पिछले विश्व कप, कतर में केवल दो ही 'आत्म-गोल' हुए थे। इस आंकड़े में भारी वृद्धि ने विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ का मानना है कि यह महज संयोग है, जबकि अन्य इसे एक उभरते हुए रुझान के रूप में देखते हैं। 'आत्म-गोल' की बढ़ती संख्या खिलाड़ियों पर दबाव और तेज़-तर्रार खेल की गति को दर्शा सकती है। यह टीमों के लिए एक नया जोखिम पैदा करता है, क्योंकि एक गलती भी हार का कारण बन सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रवृत्ति पर बारीकी से नजर रखना महत्वपूर्ण है ताकि यह समझा जा सके कि क्या यह विश्व कप 2026 की एक विशिष्ट विशेषता है या भविष्य के टूर्नामेंटों में भी जारी रहेगी। इस विषय पर आगे की जांच से खेल की रणनीति और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में बदलाव आ सकते हैं।
