ओउरा रिंग बनाने वाली कंपनी पर मुकदमा दायर किया गया है। यह मुकदमा इस दावे पर आधारित है कि कंपनी की रिंग नींद को सटीक रूप से मापने में सक्षम नहीं है। वादीयों का तर्क है कि रिंग सीधे वो संकेत नहीं माप सकती जो नींद के चरणों को निर्धारित करने के लिए ज़रूरी हैं। उनका कहना है कि रिंग के नतीजे सिर्फ़ अनुमान हैं, सटीक माप नहीं। यह मामला उपभोक्ताओं के अधिकारों और कंपनियों द्वारा किए गए दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो ओउरा को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कंपनी ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।