सीनेटर एडम्स ओशिओमहोले ने नताशा अकुपोटी-उदुघान के निलंबन से जुड़े अपने पहले के बयानों में बदलाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कभी भी निलंबन रिपोर्ट में जाली हस्ताक्षर होने का आरोप नहीं लगाया था। यह स्पष्टीकरण उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें उनके पहले के दावों को लेकर सवाल उठाए गए थे। ओशिओमहोले ने जोर देकर कहा कि उन्होंने केवल निलंबन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, न कि दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर। इस मामले में आगे की जांच जारी है। यह घटना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि यह विभिन्न गुटों के बीच आरोपों और प्रत्यारोपों का हिस्सा है। ओशिओमहोले के इस यू-टर्न से मामले की जटिलता बढ़ गई है।
