हंगरी के पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने अप्रैल में हुई ऐतिहासिक हार के बावजूद यूरोपीय संघ में सुधार लाने के अपने प्रयासों को छोड़ने से इनकार कर दिया है। ऑर्बन का मानना है कि ब्रुसेल्स में सुधार आवश्यक है, हालांकि इस विषय पर उनकी राय व्यापक रूप से भिन्न है। उन्होंने यूरोपीय संघ के भीतर बदलाव की वकालत जारी रखने का संकल्प लिया है। यह घोषणा उनके समर्थकों के बीच जारी बहस और राजनीतिक गतिविधियों के बीच आई है। ऑर्बन के इस रुख से यूरोपीय संघ के भविष्य और हंगरी की भूमिका पर संभावित प्रभाव को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। इस मामले पर आगे की चर्चा और विश्लेषण के लिए डेली न्यूज़ हंगरी के लेख को देखा जा सकता है। यह घटनाक्रम यूरोपीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत देता है।
