प्रधान मंत्री ने एक राजनीतिक विश्लेषक द्वारा की गई आलोचना पर संक्षिप्त टिप्पणी की है। उन्होंने सीधे तौर पर विस्तृत जवाब देने से परहेज किया। यह प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और इसमें विश्लेषक के दावों का खंडन नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि प्रधान मंत्री ने जानबूझकर विवाद को और बढ़ने से रोकने के लिए कम प्रतिक्रिया दी है। यह घटना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। विश्लेषक की आलोचना सरकार की नीतियों से संबंधित थी, लेकिन विशिष्ट विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। इस संक्षिप्त प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि सरकार आलोचना को गंभीरता से ले रही है, लेकिन टकराव से बचना चाहती है।