पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन और अन्य शीर्ष अधिकारियों से ‘गोल्ड काफिले’ मामले में संदिग्ध के तौर पर पूछताछ की गई है या नहीं, इस सवाल को लेकर पीटर मग्यार ने अभियोजकों से स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला हंगरी में एक कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसमें सोने के परिवहन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मग्यार ने जांच एजेंसियों पर पारदर्शिता बरतने और मामले की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने का दबाव डाला है। उनका कहना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि क्या ऑर्बन और उनके सहयोगियों पर औपचारिक रूप से आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन पक्ष ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह घटना हंगरी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर नए विवादों को जन्म दे सकती है। मामले की आगे की जांच से कई चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है।