हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान का मानना है कि देश के भविष्य पर विचार करने वाले उच्च गुणवत्ता वाले लोगों और समूहों के साथ संवाद की कमी के कारण बुद्धिजीवियों का समर्थन खोया गया है। उन्होंने सरल संदेशों को समस्या नहीं माना, और इस संदर्भ में बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रम्प का उदाहरण दिया। ओर्बान ने तर्क दिया कि प्रभावी राजनीतिक संचार के लिए जटिल विचारों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक है। उनका यह बयान हंगरी में राजनीतिक संवाद और बुद्धिजीवियों की भूमिका पर बहस को जन्म दे सकता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, सरकार को विभिन्न विचारधाराओं और विशेषज्ञता वाले लोगों के साथ नियमित रूप से संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है। यह संवाद नीति निर्माण में अधिक समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा दे सकता है। इस मुद्दे पर आगे चर्चा होने की संभावना है।