डेनिश राजनीतिक संपादक एस्बेन श्योरिंग के अनुसार, विपक्षी दलों का सरकार पर आप्रवासन नीति को लेकर दबाव बनाने का प्रयास विफल रहा। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की कोशिश की थी, लेकिन यह बड़ा टकराव नहीं बन पाया। श्योरिंग का कहना है कि सरकार पर कोई बड़ी उथल-पुथल नहीं हुई। उनकी रणनीति अपेक्षित परिणाम लाने में विफल रही। यह मामला संसद में एक त्वरित बहस का विषय बना, लेकिन इससे सरकार पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। इस घटना से पता चलता है कि विपक्ष सरकार को नीतिगत बदलाव के लिए मजबूर करने में असमर्थ रहा। कुल मिलाकर, यह विपक्ष के लिए एक निराशाजनक परिणाम था।