ओपनएआई के प्रमुख, सैम ऑल्टमैन ने ‘सिंगुलैरिटी’ की बात की है, जिससे तकनीकी जगत में हलचल मच गई है। सिंगुलैरिटी एक ऐसी काल्पनिक स्थिति है जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मानव बुद्धि को पार कर जाएगी और अनियंत्रित गति से विकसित होगी। यह विचार कि मशीनें मनुष्यों से अधिक बुद्धिमान बन सकती हैं, दशकों से विज्ञान कथाओं और तकनीकी चर्चाओं का विषय रहा है। ऑल्टमैन के अनुसार, यह भविष्य अब दूर नहीं है। सिंगुलैरिटी की अवधारणा सबसे पहले 20वीं शताब्दी के मध्य में भौतिक विज्ञानी जॉन वॉन न्यूमैन और गणितज्ञ स्टैनिस्लाव उलम द्वारा प्रस्तावित की गई थी। इस घटना के संभावित परिणामों पर बहस जारी है, कुछ इसे मानवता के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखते हैं, जबकि अन्य इसे अस्तित्वगत खतरे के रूप में मानते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि सिंगुलैरिटी कब आएगी, लेकिन ऑल्टमैन का बयान एआई विकास की तेजी और भविष्य पर इसके संभावित प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करता है।

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