पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) ने बुधवार को कहा कि 2026 में वैश्विक तेल की मांग में पिछले महीने के अनुमान से गिरावट आई है, और यह 600,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) बढ़ने का अनुमान है। यह संशोधन वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण और ऊर्जा बाजार के रुझानों को दर्शाता है। ओपेक की इस रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि तेल की मांग में वृद्धि धीमी हो रही है। यह विभिन्न कारकों जैसे कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उदय और ऊर्जा दक्षता में सुधार के कारण हो सकता है। तेल उत्पादक देशों के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत है, क्योंकि वे अपनी उत्पादन नीतियों का निर्धारण करने के लिए इस जानकारी का उपयोग करेंगे। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि ओपेक की रिपोर्ट का तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। यह निर्णय आने वाले महीनों में ऊर्जा बाजार की गतिशीलता को प्रभावित करेगा।