तेल की कीमतों में निकट भविष्य में कमी आने की संभावना नहीं है। युद्ध से पहले के दौर में तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन अब वह स्थिति जल्द ही वापस आने वाली नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे कोई समझौता हो या न हो, तेल की कीमतें आने वाले महीनों तक ऊँची बनी रहेंगी। भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश महत्वपूर्ण हो गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकारों और उद्योगों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
