अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते की घोषणा के बाद तेल की कीमतें मार्च के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गईं हैं। निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मध्य पूर्वी उत्पादक कितनी जल्दी उत्पादन और निर्यात को फिर से शुरू कर सकते हैं। समझौते की घोषणा के बाद बाजार में राहत की भावना देखी गई, लेकिन आगे की बातचीत को लेकर अनिश्चितता के कारण कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन में अभी समय लग सकता है। इस समझौते का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंधों को कम करना है, जिसके बदले में ईरान तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों को हटाने पर सहमत हो गया है। फिलहाल, बाजार सावधानी से प्रतिक्रिया दे रहा है, क्योंकि समझौते की शर्तों और दीर्घकालिक स्थिरता पर अभी भी सवाल बने हुए हैं। तेल बाजार की भविष्य की दिशा काफी हद तक आगामी वार्ताओं के नतीजों पर निर्भर करेगी।
