तेल कंपनियों ने भू-राजनीतिक विश्व स्थिति का हवाला देते हुए रिकॉर्ड कीमतों की बात कही है, लेकिन शेयर बाजार की कीमतों को देखने से एक अलग तस्वीर सामने आती है। तेल बहुराष्ट्रीय कंपनियां लगातार पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं का शोषण कर रही हैं। बाजार विश्लेषण से पता चलता है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद, पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि उचित नहीं है। क्लिंगेबाइल पर भी इस मुद्दे पर उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप लगा है। तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ रहा है, जबकि आम जनता को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए चिंताजनक है और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करनी चाहिए।