पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ एक नए समझौते की संभावना पर संदेह जताया है। उनका मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में 2015 के परमाणु समझौते से बेहतर परिणाम मिलना मुश्किल है। ओबामा प्रशासन के दौरान हुए उस ऐतिहासिक समझौते का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना था। अब वे इस बात को लेकर संशय में हैं कि क्या कोई नया समझौता उससे अधिक प्रभावी हो सकता है। यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और परमाणु नियंत्रण के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। ओबामा ने स्पष्ट किया कि पिछले समझौते के मानकों को पार करना एक कठिन चुनौती होगी। कुल मिलाकर, उन्होंने एक बेहतर विकल्प की उम्मीदों को कम बताया है।