80 साल पहले, होलोकॉस्ट के कुछ ज़िम्मेदारों पर फैसले का ऐलान किया गया था। इस फैसले ने विवाद पैदा कर दिया: फांसी की सजा, आजीवन कारावास, 20 साल तक की जेल और बरी भी। नूर्नबर्ग में नाज़ी बर्बरता के लिए केवल 12 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले में कई तरह की सज़ाएँ दी गईं, जिनमें फांसी से लेकर कारावास शामिल थे। कुछ आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी भी कर दिया गया था। यह मामला अंतर्राष्ट्रीय कानून और न्याय के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बना। नूर्नबर्ग ट्रायल, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी जर्मनी द्वारा किए गए अत्याचारों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को न्याय दिलाने का एक प्रयास था।