युवा पीढ़ी द्वारा बचपन में देखी गई दुखद फिल्मों को लेकर व्यक्त की जा रही निराशा पर एक लेखक ने टिप्पणी की है। उनका कहना है कि बच्चों की कहानियों में कभी-कभी दर्द होना आवश्यक है। यह दर्द भावनात्मक विकास का एक हिस्सा है और जीवन की वास्तविकताओं को समझने में मदद करता है। लेखक का मानना है कि हर पीढ़ी को अपनी कहानियों में दर्द का अनुभव होता है, और इसे अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखना चाहिए। बचपन की कहानियों का उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाना भी होता है। इस दृष्टिकोण से, दुखद कहानियाँ बच्चों को सहानुभूति और भावनात्मक बुद्धिमत्ता विकसित करने में मदद कर सकती हैं। इसलिए, युवाओं को बचपन की इन कहानियों को लेकर अनावश्यक रूप से मातम मनाने से बचना चाहिए।