इस सप्ताह फुटबॉल जगत में विविधता को लेकर चर्चाएं तेज रहीं। NOS ने विश्व कप के लिए बारह पुरुषों और केवल एक महिला को भेजा था। इस निर्णय को हेनक स्पान और रूस श्लिकर ने बहुत अधिक एकतरफा बताया। जवाब में NOS ने तर्क दिया कि महिला खेल पत्रकारों को ढूंढना मुश्किल होता है। लेखक का मानना है कि यह पूरी बहस घिसे-पिटे तर्कों पर आधारित थी। हालांकि, लेखक के लिए असली समस्या विविधता नहीं बल्कि कमेंट्री की गुणवत्ता है। उनके अनुसार NOS की कमेंट्री इतनी नीरस है कि उसे सुनते हुए नींद आ जाती है।