नार्वे में प्राइड (Pride) से जुड़े एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब जानिक अल्मेनिंग (30) ने नार्वे के ध्वज और इंद्रधनुषी ध्वज के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। अल्मेनिंग के इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर दी हैं, जहाँ लोग इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ लोग नार्वे के ध्वज को प्राथमिकता देने का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य इंद्रधनुषी ध्वज को प्राइड का प्रतीक मानते हुए उसका समर्थन कर रहे हैं। इस मुद्दे ने नार्वे में राष्ट्रीय पहचान और एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों के बीच एक बहस को जन्म दिया है। यह घटना नार्वे में समावेशिता और विविधता के मूल्यों पर भी सवाल उठाती है। फिलहाल, यह देखना बाकी है कि यह बहस आगे कैसे बढ़ती है और इसका क्या परिणाम निकलता है।