नॉर्वे के पूर्व केंद्रीय बैंक प्रमुख ने देश के तेल फंड के बढ़ते खर्च पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि वर्तमान 'हैंडलिंग रूल' के कारण मौद्रिक नीति अत्यधिक विस्तारवादी होती जा रही है। जैसे-जैसे तेल फंड का आकार बढ़ रहा है, सरकारी खर्च में भी बेतहाशा वृद्धि हो रही है। यह स्थिति अर्थव्यवस्था में अस्थिरता पैदा कर सकती है। पूर्व प्रमुख ने इस खर्च पर लगाम लगाने और अधिक अनुशासन अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका तर्क है कि बिना नियंत्रण के यह खर्च भविष्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। यह विश्लेषण नॉर्वे की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।