मुहर्रम का महीना पैगंबरों के लिए महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। इस महीने में, नूह (नूह) पैगंबर की कहानी एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में दर्ज है। मान्यता है कि नूह पैगंबर और उनके अनुयायी 150 वर्षों तक भीषण बाढ़ में फंसे रहे। बाढ़ के बाद, उनका जहाज (बहतर) अंततः मुहर्रम महीने में एक पर्वत पर आकर रुका। यह घटना नूह पैगंबर और उनके विश्वासियों के लिए एक बड़ी राहत और ईश्वर की कृपा का प्रतीक मानी जाती है। मुहर्रम, इसलिए, इस्लामी परंपरा में विशेष महत्व रखता है और इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।