नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जून में प्रीमियम मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) का औसत दैनिक आयात 5.9 मिलियन लीटर से बढ़कर 18.1 मिलियन लीटर हो गया, और जुलाई में यह बढ़कर 19.7 मिलियन लीटर हो गया। यह वृद्धि स्थानीय रिफाइनिंग क्षमता बढ़ने के बावजूद देखी गई है। यह डेटा केंद्र फॉर पेट्रोलियम, एनर्जी इकोनॉमिक्स रिसर्च (CPPE) द्वारा जारी किया गया है। आयात में इस उछाल से देश की ईंधन सुरक्षा पर सवाल उठ सकते हैं। विशेषज्ञ इस स्थिति के कारणों का विश्लेषण कर रहे हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें और स्थानीय उत्पादन में संभावित कमियां शामिल हैं। इस वृद्धि से सरकार और ऊर्जा उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है कि वे आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कदम उठाएं। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए भी चिंताजनक है क्योंकि इससे पेट्रोल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।