मुख्य न्यायाधीश ने देश के सभी न्यायालयों के विभाग प्रमुखों और इकाई प्रमुखों को आधिकारिक पत्राचार में वकीलों द्वारा ‘बैरिस्टर’ उपाधि के प्रयोग पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। यह निर्णय कानूनी पेशे में एकरूपता और मानकों को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। न्यायालयों को इस निर्देश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इस कदम से वकीलों के आधिकारिक संचार में स्पष्टता और सटीकता लाने में मदद मिलेगी। यह निर्देश सभी स्तरों के न्यायालयों पर लागू होगा। इस फैसले से कानूनी समुदाय में चर्चा छिड़ गई है, कुछ ने इसका स्वागत किया है जबकि अन्य ने इस पर चिंता व्यक्त की है। यह कदम पेशे में प्रचलित विविध उपाधियों और पदनामों को विनियमित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।