नाइजीरिया में 12 जून के चुनाव को 33 वर्ष पूरे हो चुके हैं। उस चुनाव प्रक्रिया, जिसे ‘ऑप्शन ए4’ कहा गया था, में पारदर्शिता थी, हालांकि यह सरल थी। इसमें केवल दो उम्मीदवार थे और मतदाताओं को अंगूठे का निशान लगाने की आवश्यकता नहीं थी। यह चुनाव नाइजीरिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। अब सवाल यह है कि क्या नाइजीरिया फिर कभी ऐसा ही निष्पक्ष और सरल चुनाव करवा पाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल और चुनावी प्रक्रियाओं में बदलाव के कारण ऐसा होना मुश्किल है। फिर भी, नाइजीरियाई लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष चुनावों की आवश्यकता बनी हुई है।