न्यूज़ीलैंड को जलवायु परिवर्तन के प्रति निष्क्रिय रहने के कारण पाँच अरब डॉलर का भारी बिल चुकाना पड़ सकता है। यह अनुमान देश के पहले पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक कार्बन क्रेडिट खरीदने की लागत पर आधारित है। पूर्व प्रधानमंत्री जॉन की ने यह लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें विदेशों से क्रेडिट खरीदने की अपेक्षा की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्सर्जन में कमी के पर्याप्त उपाय न करने से यह वित्तीय बोझ बढ़ा है। इस राशि का उपयोग अन्य देशों से कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए किया जाएगा, जिससे न्यूज़ीलैंड अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा कर सके। यह मामला देश में जलवायु नीति और उत्सर्जन कटौती की तात्कालिक आवश्यकता पर बहस को तेज कर सकता है। यह वित्तीय बोझ न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
