न्यूज़ीलैंड वर्तमान में बिजली की कमी से निपटने के लिए एक अरब डॉलर की एलएनजी टर्मिनल स्थापित करने की प्रक्रिया में है। वहीं, सरकार ने एक विशाल 1GW आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर को भी मंजूरी दे दी है। यह डेटा सेंटर, टिवई पॉइंट स्मेल्टर से दोगुना बिजली खपत करेगा। इस निर्णय ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि आलोचकों का मानना है कि यह एलएनजी टर्मिनल स्थापित करने के उद्देश्य को विफल कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा सेंटर की भारी ऊर्जा मांग, देश के ऊर्जा संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डालेगी। इस परियोजना को लेकर पर्यावरणविदों और ऊर्जा विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है, और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। यह कदम न्यूज़ीलैंड की ऊर्जा नीति और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर बहस को जन्म दे रहा है।