दैनिक प्रावो के गुरुवार के साहित्यिक और सांस्कृतिक परिशिष्ट में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई है। फिल्म 'चिका चेका' पर शिमोन होली के साथ एक विशेष बातचीत शामिल है। इसके अतिरिक्त, ज़ुज़ाना कुल्ताना 'गलत समझे कलाकार' की मिथक पर अपने विचार प्रस्तुत करती हैं। परिशिष्ट में कामेन्का के 'रिपब्लिका' नामक पुस्तक पर भी चर्चा की गई है। यह परिशिष्ट साहित्य और संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। पाठकों को फिल्म, कला और साहित्य के क्षेत्र में नवीनतम रुझानों और विचारों से अवगत कराया जाएगा। यह परिशिष्ट प्रावो अखबार के पाठकों के लिए एक नियमित सुविधा है जो बौद्धिक और सांस्कृतिक उत्तेजना प्रदान करती है।
