परिमल भट्टाचार्य के ‘सातगार हौवातांतिरा’ उपन्यास को पढ़ने के बाद लेखक एक खोई हुई अवस्था में थे। इसी बीच, उन्होंने परवेज हुसैन का ‘सुवर्णपुराण’ पढ़ा। दो उपन्यासों को एक साथ पढ़ने से लेखक को एक संयोग महसूस हुआ। दोनों उपन्यासों के विषय और दृष्टिकोण में समानता है, और एक ही समय में पढ़ने के अनुभव से एक भ्रम पैदा होता है। परवेज हुसैन लेखक के पसंदीदा कहानीकार हैं, और चूंकि यह उनका पहला उपन्यास है, इसलिए उनकी रुचि अधिक थी। यह समीक्षा ‘सुवर्णपुराण’ के साहित्यिक महत्व और लेखक के व्यक्तिगत पठन अनुभव को उजागर करती है।