मेडेन ने स्वीकार किया कि वह अपनी पहली संतान को जन्म देने के बाद सदमे में थी। जन्म देने के अनुभव से उन्हें डर लगा था और वह मानसिक रूप से परेशान थीं। हालांकि, जैसे ही उन्होंने अपने नवजात शिशु के प्यारे और मनमोहक चेहरे को देखा, उनका सारा डर गायब हो गया। शिशु के चेहरे की मासूमियत ने उन्हें खुशी से भर दिया। अब वह अपनी संतान के साथ खुश हैं और मातृत्व का आनंद ले रही हैं। यह कहानी उन माताओं के लिए प्रेरणादायक है जो प्रसव के बाद सदमे या डर का अनुभव करती हैं। यह दर्शाती है कि माता और शिशु के बीच का बंधन सबसे मजबूत होता है और किसी भी नकारात्मक भावना को दूर कर सकता है।