इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, नया चाँद देखना अल्लाह से रहमत मांगने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) नए चाँद को देखकर अपने अनुयायियों के साथ एक विशेष दुआ (प्रार्थना) करते थे। यह दुआ अल्लाह से आशीर्वाद और कल्याण की कामना करती है। इस प्रथा को 'सुन्नाह' कहा जाता है, जिसका अर्थ है पैगंबर के बताए हुए रास्ते का पालन करना। नए चाँद को देखना इस्लामी संस्कृति में शुभ माना जाता है और यह नए महीने की शुरुआत का प्रतीक है। यह दुआ समुदाय को एकजुट करती है और अल्लाह के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है। इस अवसर पर लोग अल्लाह से आने वाले महीने में मार्गदर्शन और सफलता की प्रार्थना करते हैं।
