कुआंतन हाई कोर्ट ने एक न्यूरोलॉजिस्ट को महिला कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार के आरोप से बरी कर दिया है। पांच साल पहले, उस पर एक निजी अस्पताल की महिला कर्मचारी के साथ दो बार आपराधिक बल का प्रयोग करने का आरोप था, जिसके लिए उसे एक साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने पाया कि परीक्षण में गंभीर पूर्वाग्रह था, जिसके कारण यह फैसला लिया गया। न्यायाधीशों ने माना कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। इस मामले में, अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा। अदालत ने न्यूरोलॉजिस्ट को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है, जिससे यह मामला समाप्त हो गया है। यह फैसला कानूनी प्रक्रिया में निष्पक्षता और सबूतों के महत्व को दर्शाता है।