न्यूरोडाइवर्सिटी वाले लोगों को अक्सर सामान्य आबादी की तुलना में अधिक उत्पीड़न, उपहास और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह उत्पीड़न शारीरिक हिंसा से लेकर संरचनात्मक भेदभाव तक कई रूप ले सकता है। अध्ययन बताते हैं कि ये व्यक्ति नियमित रूप से मजाक और बदनामी का शिकार होते हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूरोडाइवर्सिटी को लेकर असंवेदनशील हास्य हानिकारक है और इसे बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। यह ज़रूरी है कि समाज में समावेशिता और सम्मान को बढ़ावा दिया जाए। इस समूह के लोगों के प्रति सहानुभूति और समझ विकसित करना आवश्यक है ताकि उन्हें सुरक्षित और समर्थित महसूस हो सके। इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाना और पीड़ितों के लिए सहायता प्रदान करना महत्वपूर्ण है।