पूर्व प्रधानमंत्री रूटे ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान लिए गए उपायों में सामाजिक पहलुओं को अनदेखा नहीं किया गया था। अप्रैल 2020 के दूसरे और तीसरे सप्ताह को उन्होंने महामारी के सबसे तनावपूर्ण दौर के रूप में वर्णित किया। रूटे ने जोर देकर कहा कि सरकार ने लोगों की मानसिक और सामाजिक भलाई को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लिए थे। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि लॉकडाउन और अन्य प्रतिबंधों का लोगों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। रूटे ने यह भी बताया कि सरकार ने सामाजिक संपर्क बनाए रखने और अकेलेपन से निपटने के लिए विभिन्न पहल की थीं। उनका यह बयान महामारी के दौरान सरकार की प्रतिक्रिया की आलोचनाओं के जवाब में आया है, जिसमें सामाजिक प्रभावों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया था। रूटे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सामाजिक आयाम हमेशा विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।