ईरान परमाणु समझौते पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू की आश्चर्यजनक चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्लेषक अमीत सेगल के अनुसार, नेतन्याहू, जिन्होंने पहले राजनीतिक समझौतों का विरोध किया था, अब पूरी तरह से चुप्पी साधने की रणनीति क्यों अपना रहे हैं, यह एक केंद्रीय प्रश्न है। यह चुप्पी कई अटकलों को जन्म दे रही है। सेगल का विश्लेषण इस बात पर केंद्रित है कि नेतन्याहू की इस रणनीति के पीछे क्या कारण हो सकते हैं। यह स्थिति इस समझौते के प्रति इजराइल की प्रतिक्रिया और भविष्य की रणनीति को लेकर अनिश्चितता पैदा करती है। फिलहाल, नेतन्याहू की चुप्पी को लेकर विभिन्न राजनीतिक हलकों में बहस जारी है। इस मामले में आगे की जानकारी का इंतजार है।