प्रसिद्ध चिली कवि पाब्लो नेरुदा का मानना था कि खेलना केवल बच्चों का काम नहीं है। उन्होंने अपने संस्मरणों में बताया कि खेल और कल्पना उनके जीवन का अभिन्न अंग थे। नेरुदा के अनुसार, जो व्यक्ति खेलना भूल जाता है, वह अपने भीतर के बच्चे को हमेशा के लिए खो देता है। उन्होंने वस्तुओं के प्रति अपने आकर्षण और संग्रह करने की आदत को भी अपनी रचनात्मकता से जोड़ा। नेरुदा का कहना था कि खेल मनुष्य को उसकी जड़ों से जोड़े रखता है और उसे जीवन के प्रति उत्साहित रखता है। उनका यह विचार हमें याद दिलाता है कि व्यस्त जीवनशैली में भी हमें अपने भीतर के बच्चे को जीवित रखना चाहिए। खेल, कल्पना और रचनात्मकता हर उम्र में महत्वपूर्ण हैं।

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