नेपाल के तराई क्षेत्र में पारंपरिक अनाज मंडियाँ धीरे-धीरे समाप्त हो रही हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि अब सीधे किसानों से खरीददारी करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है और कृषि उत्पादन में भी गिरावट आई है। इससे किसानों की मोलभाव करने की शक्ति कमज़ोर पड़ रही है। पहले जहाँ किसान मंडियों में अपनी उपज बेचकर उचित मूल्य प्राप्त कर सकते थे, अब वे बिचौलियों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव किसानों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। उत्पादन में कमी के कारण मंडियों में आने वाली उपज भी घट रही है, जिससे उनका महत्व कम हो रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए किसानों को संगठित होने और सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने की आवश्यकता है। सरकार को भी किसानों के हितों की रक्षा के लिए उचित नीतियाँ बनानी होंगी।