नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने एक नई नीति अपनाई है जो कानूनी अनुसंधान, केस मैनेजमेंट और प्रशासनिक कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग की अनुमति देती है। हालांकि, इस नीति में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एआई का उपयोग न्यायिक निर्णयों, याचिकाओं या अन्य ऐसे मामलों में नहीं किया जाएगा जिनमें न्यायिक विवेक की आवश्यकता होती है। इसका मतलब है कि न्यायाधीशों द्वारा दिए जाने वाले अंतिम फैसले अभी भी मानवीय विवेक पर आधारित होंगे। यह कदम कानूनी प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि एआई कानूनी पेशेवरों को प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और दक्षता बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन यह न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है कि अंतिम निर्णय मानव द्वारा ही लिया जाए। यह नीति एआई के उपयोग और मानव निर्णय के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास करती है। इस पहल से न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।