नेपाल के रविंद्र शाक्या पिछले 35 वर्षों से ‘रिपौसी’ कला की साधना कर रहे हैं। यह सदियों पुरानी कला है जिसमें एक बड़े कलाकृति को पूरा होने में लगभग दो साल लग सकते हैं। ‘रिपौसी’ धातु को पीटकर उभार देने की एक विशेष तकनीक है, जिससे जटिल डिजाइन बनाए जाते हैं। शाक्या की यह कला नेपाल की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह शिल्प पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और इसमें अत्यधिक धैर्य और कौशल की आवश्यकता होती है। इस कला के माध्यम से बनाई गई वस्तुएं अपनी सुंदरता और जटिलता के लिए जानी जाती हैं। ‘रिपौसी’ कला नेपाल में आज भी जीवित है और शाक्या जैसे कलाकार इसे संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।