नेपाल में बालेन्द्र शाह सरकार के पहले १०० दिनों में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। मीडिया समूहों ने मंत्रियों की चेतावनियों, ऑनलाइन डराने-धमकाने, विवादित विज्ञापन नीति और अदालती फैसलों को प्रेस पर बढ़ते दबाव के प्रमाण के रूप में उजागर किया है। सरकार पर पत्रकारों को चुप कराने और मीडिया को नियंत्रित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया जा रहा है। यह स्थिति नेपाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा है। कई पत्रकारों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई है और सरकार से प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करने का आग्रह किया है। इस मामले पर सरकार की प्रतिक्रिया अभी तक स्पष्ट नहीं है।

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