अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों - एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और आईसीजे ने नेपाल की न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इन समूहों का कहना है कि न्यायिक नियुक्तियों के नियमों में बदलाव और न्यायाधीशों पर कथित दबाव न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है। उन्होंने विशेष रूप से न्यायिक परिषद में राजनीतिक हस्तक्षेप और न्यायाधीशों के मूल्यांकन में पारदर्शिता की कमी पर प्रकाश डाला है। इन परिवर्तनों से निष्पक्ष सुनवाई और कानून के शासन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। मानवाधिकार समूहों ने नेपाल सरकार से आग्रह किया है कि वह न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी नियुक्तियाँ पारदर्शिता के साथ करने का भी आह्वान किया है। इन समूहों का मानना है कि एक स्वतंत्र न्यायपालिका ही मानवाधिकारों की रक्षा कर सकती है।

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