नेपाली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शेर देउबा द्वारा हिंदू एजेंडा को अपनाने पर विश्लेषकों का मानना है कि यह उनके राजनीतिक प्रासंगिकता को पुनः प्राप्त करने का एक हताश प्रयास है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह उनके मूल्यों में कोई वास्तविक बदलाव नहीं, बल्कि सत्ता में बने रहने की रणनीति है। देउबा पहले इस एजेंडे को लेकर अवरोध उत्पन्न करते थे, लेकिन अब उनका रुख बदल गया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह निर्णय आगामी चुनावों और पार्टी के भीतर अपनी स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। इस कदम से नेपाल की धर्मनिरपेक्षता पर भी बहस छिड़ सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि देउबा का यह बदलाव नेपाली राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

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