नेपाल के बैंकों के पास भारी मात्रा में अतिरिक्त नकदी उपलब्ध है, लेकिन जटिल प्रक्रियाओं और जमानत की सख्त आवश्यकताओं के कारण गरीब और कमजोर नेपाली नागरिकों को ऋण प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। बैंकों की यह अतिरिक्त तरलता ऋण लेने वालों तक नहीं पहुँच पा रही है, जिससे उन्हें साहूकारों जैसे शोषणकारी ऋणदाताओं का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऋण प्राप्त करने के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई और जमानत की शर्तें कमजोर आय वाले लोगों के लिए बहुत मुश्किल हैं। इस स्थिति से वित्तीय समावेशन में बाधा आ रही है और आर्थिक असमानता बढ़ रही है। सरकार और बैंकों को ऋण वितरण प्रणाली को सरल बनाने और जरूरतमंद लोगों तक वित्तीय सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता है। अन्यथा, यह स्थिति नेपाली अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।