नेपाल में ऋण देने और वसूली से जुड़े मामलों में पुलिस जांच और गिरफ्तारियां बढ़ रही हैं। इससे एक महत्वपूर्ण सवाल उठा है कि बैंकिंग प्रणाली की निगरानी कौन करे - केंद्रीय बैंक या कानून प्रवर्तन एजेंसियां? बैंकर्स अब ऋण देने में सावधानी बरतने लगे हैं, क्योंकि उन्हें वसूली में कानूनी जटिलताओं का डर है। यह स्थिति वित्तीय क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर विनियमन की आवश्यकता है ताकि बैंकों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जा सके और ऋण वसूली प्रक्रिया को सुधारा जा सके। इस मुद्दे पर केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच विचार-विमर्श जारी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस समस्या का समाधान कैसे निकाला जाता है, क्योंकि इसका असर नेपाल की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।