नेपाल और तिब्बत की सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 362 लोगों की जान जा चुकी है और 1400 से अधिक लोग लापता हैं। यह बाढ़ चट्टानों, बर्फ और मलबे के हिमस्खलन के कारण आई, जिसने पूरे गांवों को तबाह कर दिया। सड़कें, पुल और पनबिजली परियोजनाएं भी इस आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना एक ग्लेशियर के टूटने के कारण हुई, जिसने एक नदी को अवरुद्ध कर दिया था। ग्लेशियर के टूटने से भारी मात्रा में पानी का बहाव हुआ, जिससे बाढ़ आई और भारी तबाही हुई। बचाव कार्य जारी है, लेकिन लापता लोगों की तलाश करना मुश्किल हो रहा है। यह आपदा क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चिंता बढ़ा रही है।

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