नेपाल के तराई क्षेत्र में हाल की घटनाओं से पता चलता है कि राजनीतिक और सामाजिक समन्वय की कमी के कारण सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। देवानगंज हिंसा की शुरुआत के साथ, समन्वय में देरी का परिणाम जान-माल के नुकसान और समुदायों के बीच अविश्वास में वृद्धि के रूप में सामने आया। यह अशांति प्रारंभिक घटना से भी आगे फैल गई। इस स्थिति से सबक लेते हुए, प्रभावी राजनीतिक हस्तक्षेप और सामाजिक जुड़ाव ही सांप्रदायिक संघर्षों को शांत करने में सहायक हो सकते हैं। समय पर उचित समन्वय से समुदायों के बीच विश्वास बहाल किया जा सकता है। यह देखा गया है कि संवाद और सहयोग अशांति को बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए, सरकार और स्थानीय समुदायों को मिलकर काम करना होगा।